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एमएसपी और कृषि कानून की वापसी

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाकर लागू करना कोई सहज कार्य नहीं है . आंदोलन करने वाले किसान संपूर्ण भारत के किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं . कृषि बिल का समर्थन कुछ किसानों द्वारा किया जा रहा है .  किसान संगठन द्वारा चलाए जाने वाले आंदोलन को लंबे समय तक खींचा जाना सरकार और किसानों के बीच विश्वसनीयता और विचार विमर्श का रास्ता अस्पष्ट करते हैं.  यदि कृषि बिलों को सरकार हटाती है और एमएसपी का कानून बनता भी है तो उसे उस रूप में लागू करना कठिन है .  एमएसपी वाले मूल्य से लाभ सिर्फ बड़े जोत वाले किसान ही उठा पाएंगे क्योंकि ज्यादा विरोध प.उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के किसान संगठनों द्वारा किया गया है . इन क्षेत्रों में बड़े काश्तकार  रहते हैं और इनकी मोटी कमाई का जरिया एफसीआई द्वारा एमएसपी पर खरीद मूल्य है. किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले आंदोलनकारियों के प्रति सरकार भी सावधान रही है किंतु आंदोलन के आड़ में राजनितिक विरोधियों द्वारा भी उल्लू सीधा करने का प्रयास किया जा रहा है .  सरकार के द्वारा कृषि सुधार कानून को बनाकर परंपरागत नियमों से छुटकारा दिय...