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अगस्त, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तालिबानी शासन और भारत का रवैया

विगत कुछ दिनों से तालिबान भारत के साथ अपने रिश्ते  में सुधार को लेकर चर्चा में है जिसे भारत सरकार के अनुकूल स्टेटमेंट जारी कर वह दुनिया के सामने रख रहा है. लेकिन तालिबान के कथनी और करनी में अंतर है . 1996 से  2001 तक तालिबान का अफगानिस्तान पर शासन के दौरान देखा जा चुका है शरिया के अनुसार उनका कानून और विशेषकर महिलाओं और बच्चों के साथ किए जाने वाले उनके अमानवीय व्यवहार  को पूरी दुनिया ने देखा. भारत के लिए 1996 की कंधार हाईजैक  की पुरानी चोट और ऊपर से तालिबान का भारत के अनुकूल स्टेटमेंट कुछ हजम नहीं होने  वाली बात है.   भारत सरकार द्वारा अपने दूतावास को तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए बंद करने का फैसला किया गया और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्धता जताते हुए एक विशेष ऑपरेशन के तहत भारतीय वायुसेना के विमान द्वारा भारत लाया जा रहा है.  प्रधानमंत्री द्वारा अभी हाल ही में यह कहना कि आतंक के बलबूते यदि कोई सरकार बना भी ले वह अस्थाई नहीं हो सकता है इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत तालिबानी शासन को किस नजरिए से देखता है. अभी अफगानिस्तान मे...

विचारों की मनोदशा

 मस्तिष्क थका हुआ सा लेखनी को धीमी गति से सफेद कागज पर ले जाते हुए मेरे विचारों को लिपिबद्ध करने का प्रयास कर रहा है लेकिन सोचने की क्षमता अवरुद्ध सी हो गई है. नए विचार कहां से लाऊं? आंतरिक ध्वनि  मुझे विचार शून्य करती जा रही है  अवरुद्ध होने का प्रयास जारी है फिर भी  लिखता जा रहा हूं . दैनिक कार्यों में से एक कार्य अध्ययन- अध्यापन से जुड़ा है इसीलिए लेखनी को तराशने की कोशिश करता रहता हूं. विचारों के भवर में होने से अच्छा है कि दो शब्द मन के अल्फाजों को लिखते हुए नींद की आगोश में चला जाऊं. हो सकता है लिखना आधा अधूरा रह जाए और मैं सो जाऊं एक मधुर सपनों को देखता हुआ. जब नींद से प्रातः उठ जाऊं तो मुझे विस्मृत हो जाए शेष लेखन का सफर. जीवन का उद्देश्य एक उपलब्धि को पाने की ललक बहुत कम लोगों में होती है क्यों ?इसलिए कि भौतिकवादी जीवनयापन आपके विचारों को सीमित कर देता है और आप न चाहते हुए भी अपने इस जीवन शैली के बंधनों में उलझ कर रह जाते हैं. अभी अपनी यही मनोदशा है. आप यह जानते हैं कि मन कमबख्त  बहुत ही चलायमान है. इसे आपके नियंत्रण की आवश्यकता नहीं ,जहां चाहे वहां मौज...

तालिबानी अफगानिस्तान और भारत पर उसके प्रभाव

तालिबान का काबुल पर कब्जा होने के बाद उसके द्वारा सार्वजनिक रूप से यह कहा गया कि वहां की आवाम को उन से डरने की आवश्यकता नहीं है. फिर भी तालिबान के विगत वर्षों के अनुभव से उस पर विश्वास करना संभव नहीं है .अफगानिस्तान के लोगों का पलायन बाहर के मुल्कों में तेजी से हो रहा है. तालिबानी नेताओं द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया कि वह बदल गए हैं. उसके कथनी और करनी में अब तक अंतर ही रहा है. काबुल को नियंत्रण में लेते ही स्त्रियों पर उसने अपने कानून सख्त कर दिए. अफसर गनी अपने कुछ लोगों के साथ विदेश पलायन कर गए क्योंकि अमेरिका ने मदद करने से हाथ खड़े कर दिए. अमेरिकी रणनीति 9/11 के आतंकी हमले को अमेरिका द्वारा मानवता बनाम आतंकवाद के युद्ध का नाम दिया गया वहीं तात्कालिक राष्ट्रपति जो बिडेन का यह कहना है कि बस; अमेरिकी धरती पर किसी प्रकार का आतंकवादी हमला न हो दोहरे मापदंड को दर्शाता है. एक तरफ आतंकियों के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई को विश्वरूप देना तो दूसरी तरफ अपनी अस्मिता की दुहाई देना समझने वाली बात है. अमेरिका को आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में काफी नुकसान उठाना पड़ा जिस...

योगी ;कर्मयोगी, राजयोगी, बनाम राजभोगी

योग अर्थात व्यक्ति विशेष का समाज से जुड़ाव है. समाज से जुड़कर समाज के अनुरूप रहते हुए समाज के लिए कार्य करने वाला व्यक्ति योगी है. एक योगी का कार्य मानव मात्र के लिए कल्याण है किसी मजहब के लिए नहीं . आपको थोड़ी द्विधा भी होगी और अचरज भी.  एक आदर्श समाज की स्थापना योग है.इसमें रमे रहना योग है और कर्ता योगी है. सामाजिक निर्माण की कल्पना से ही राष्ट्र का स्वरूप निर्धारित होता है और योगी का तपोबल उसमें कार्य करता है .उसकी रचना में प्रकृति भी सहायता करती है .चाहे प्राकृतिक आपदा हो या मानवीय आपदा सदैव योगी की परीक्षा होती है और व्यक्ति कर्ता होते हुए भी अकर्ता का भाव लेकर नित्य निरंतर समाज निर्माण में लगा रहता है. संभावित घटनाओं का साक्षी होते हुए भी एक दृष्टा का भाव योगी रखता है, अनासक्त होकर कर्म करता है. योगी की श्रेणी में इससे ऊपर राजयोगी आता है जो इससे अधिक अनासक्त होता है. राजयोगी समस्त भौतिक सुखों से जुड़ा रह कर भी अनासक्त होकर कर्म करता है. वह राजप्रासाद का उपयोग जन कल्याण हेतु करता है. नियमों से बंधे होने के कारण सैद्धांतिक जीवन जीता है और समाज कल्याण का कार्य करता है.  कोई ...

स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ और वर्तमान सरकार

आजादी को हासिल किए हमें 75 वर्ष हो गए. इन वर्षों में हमने काफी कुछ उतार-चढ़ाव देखे हैं. विभिन्न विचारधाराएं आई और चली गई. ठीक ही कहते हैं समय से पहले औरअवसर से ज्यादा कुछ भी आप हासिल नहीं कर सकते. हमारे रहन-सहन से लेकर कामकाज के तरीके में परिवर्तन आया है .देश ने तरक्की की है इस बात को नकारा नहीं जा सकता है. आने वाले दशक में हम दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देशों में पहले पायदान पर होंगे यह भी सत्य हैं जो हमारे लिए चुनौतीपूर्ण है.  समय और संसाधन दोनों हमारे पास सीमित हैं जिनका भरपूर उपयोग करना हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या है. जनसंख्या के आशावादीता का सिद्धांत बढ़ती जनसंख्या पर लागू होते हैं लेकिन कुछ हद तक .उसके पश्चात न ही संसाधन बचते हैं और ना ही समय. आप करेंगे तो क्या? भुखमरी बेरोजगारी गरीबी अपराध हत्या और आत्महत्या के सिवा आपके पास कुछ भी नहीं रहता. अवसर के रूप में आप आईएसआईएस और तालिबान से सबक ले सकते हैं जो इसी का परिणाम है.  सत्ता में जब सशक्त सरकार होती है तो कधार हाईजैकिंग, आतंकी हमला, कारगिल युद्ध जैसी घटनाएं नहीं घटतीं. इनके प्रतिक्रिया स्वरूप तत्काल निर्णय लिए जाते ...

संसद की मर्यादा हाशिए पर

मानसून सत्र के आखिरी दिन संसद के दोनों सदनों के सांसदों द्वारा जिस प्रकार का बर्ताव संसद सत्र के दौरान किया गया वह बहुत निंदनीय है और ऐतिहासिक दृष्टि से लोकतंत्र की मर्यादा को शर्मसार करने वाली है. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की विधायिका का जब यह हाल है तो लोकतंत्र राम भरोसे ही समझिए. राज्यसभा जिसे बड़े बुजुर्गों का सदन कहा जाता है गणमान्य लोगों का सदन है और स्थाई सदन भी है जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता है ऐसा हम जानते हैं लेकिन इस सदन को भंग करने का ऐसा भी एक तरीका आने वाले दिनों में हो सकता है इसे हमने देखा और जाना भी. सरकार संसद सत्र के दौरान विभिन्न बिलों पर चर्चा करने के मूड में दिख रही थी लेकिन विपक्ष सरकार का पेगासस मुद्दे पर  घेराव करना चाह रही थी. बिलों पर चर्चा करने के बजाय पक्ष - विपक्ष द्वारा शोर कर संसद का कार्य बाधित करने का प्रयास किया गया . यह काम 10 और 11 अगस्त को दोनों सदनों में पक्ष- विपक्ष के सांसदों द्वारा किया गया. यह संसद कार्यकाल में डिजिटल मीडिया में हमेशा के लिए दर्ज कर लिया गया है. दोनों ही पक्षों द्वारा अब आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं. गलती किसकी है ...

अन्य पिछड़े वर्ग की राह नई जनसंख्या नीति 2021

लोकसभा में 10 अगस्त को पेगासस मुद्दे पर बहस के बीच ही कुछ विधेयक लाए गए जिसमें ओबीसी विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. आने वाले विधानसभा चुनाव 2022 में इसका फायदा राजनीतिक दलों को मिलने की संभावना बनती है. जिस राजनीतिक दल द्वारा जातियों को ओबीसी में शामिल किया जाएगा उसका फायदा उन्हें मिलेगा. हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में 27 ओबीसी मंत्रियों को शामिल किया गया है और ओबीसी कानून भी लाया गया जिसकी राजनीतिक मंशा स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है और हाँ 50 फ़ीसदी आरक्षण का  हर हालत में ध्यान में रखना है. अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित परीक्षाओं में 15% अनुसूचित जातियों से 7.5% जनजातियों से और 27% ओबीसी वर्ग  से आरक्षण दिया जाता है.  ऐसे में  राज्य सरकारों द्वारा ओबीसी श्रेणी में जातियों को शामिल करने पर इसका दायरा बढ़ाने की आवश्यकता होगी.  करीब 671 जातियां ऐसी पूरे देश में  हैं जो ओबीसी श्रेणी के अंतर्गत आने लायक है . इसलिए एक महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि किसे शामिल किया जाए और किसे इस श्रेणी से हटाया जाए.   राज्य सरकारों को इन विकट समस्याओं ...

127वां संविधान संशोधन और जाति आधारित जनगणना

पृष्ठभूमि 2021 की जनगणना की राह जातीय समीकरण की ओर जाते हुए प्रतीत हो रही है और इसी को देखते हुए जहां उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण विधेयक 2021 प्रारूप तैयार कर इसे पारित करने का प्रयास किया जाएगा वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार द्वारा 10 अगस्त को 127 वां संविधान संशोधन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 342 और 366 (22)cमें संशोधन कर राज्यों को ओबीसी सूची बनाने का अधिकार दिया गया. अब राज्य अपने स्तर पर हो रही मांगों के अनुसार ओबीसी सूची तैयार कर सकेंगे. इस विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों द्वारा पारित कर राज्यों को यह अधिकार दिए गए जो लंबे समय से मांग किए जा रहे थे .  ओबीसी समूह में शामिल होने को लेकर महाराष्ट्र में मराठा समुदाय, हरियाणा में जाट ,गुजरात में पटेल और कर्नाटक में लिंगायत समुदाय द्वारा मांग की जा रही थी अब उन्हें इस कैटेगरी का लाभ मिल सकेगा. राजनीतिक पहल जाति आधारित जनगणना की पहल मोदी सरकार द्वारा पहले की गई किंतु पार्टी के आंतरिक दबाव के कारण इसे बीच में ही छोड़ना पड़ा था. महाराष्ट्र में भी पूर्व के बीजेपी सरकार द्वारा मराठा समूह को लेकर एक विधेयक पारित किया ...

COVID -19 और वर्तमान शिक्षा का बदलता स्वरूप

सभ्यताओं का उत्थान और पतन मानव जीवन के विकास और विनाश की कहानी है या यह कह लें कि मानव सभ्यताएं अपने शीर्ष पर पहुंच कर ज़मीनदोज़ हो जाती हैं जो मानवीय भूल और उसकी मूर्खता का कारण होती हैं .प्रत्येक सभ्यता की अपनी एक अलग पहचान होती है .कुछ सभ्यताओं के पतन के कारण महामारी भी हैं. यह सभ्यताएं या तो पूर्णःगर्त में चली जाती हैं या फिर आंशिक रूप से परिवर्तित होकर समय के अनुसार नया रूप ले लेती हैं. वर्तमान स्थिति इसी तरह की बन गई है. कोविड-19 ने पूरी दुनिया के व्यापार वाणिज्य से लेकर शिक्षा व्यवस्था तक को पूरी तरह प्रभावित किया है. हमारे देश के स्कूल कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान पूर्णतः कुछ महीने तक बंद रहे नतीजा यह हुआ की पठन-पाठन सत्र विलंब से शुरू हुए. हमारे परंपरागत पठन-पाठन के तरीके में परिवर्तन आया और लोग घर बैठे ही अध्ययन के सहायक सामग्रियों का उपयोग करने लगे जिसमें तकनीकी की महत्वपूर्ण भूमिका है. हम जानते हैं कि भारत में कागज का उपयोग विश्व में सबसे ज्यादा किया जाता है. बढ़ते महामारी के कारण कागज का क्रय जो पुस्तक, पुस्तिकाओं,समाचार पत्रों के रूप में है कम किया गया है उसका भी विकल्प ड...

हिंदू, मुसलमान और जनसंख्या नीति

भारत की जनसंख्या जिस रफ्तार से बढ़ रही है आने वाले दशक में यह देश विश्व की सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश होगा . पिछले सप्ताह ही उत्तर प्रदेश द्वारा जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट 40 पन्नों का तैयार किया गया जिस पर राजनीति शुरू हो गई. विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि यह योगी सरकार का एक  चुनावी स्टंट है. इसमें मुसलमानों की आबादी को निशाना बनाया जा रहा है जबकि जनसंख्या नियंत्रण कानून किसी एक मज़हब से तालुकात नहीं रखता. यह सभी के लिए समान रूप से लागू होता है इस बात की पुष्टि करते हुए कि सच्चाई क्या है ? क्या जनसंख्या नियंत्रण किसी एक वर्ग विशेष से तालुकात रखता है इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखते हैं. इससे पहले कि हम इसकी चर्चा करें उत्तर प्रदेश की जनसंख्या के बारे में कुछ तथ्य स्पष्ट कर दें *उत्तर प्रदेश की वर्तमान आबादी दुनिया के पांचवें देश के बराबर है . *1901 -1951 तक उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में 30% की वृद्धि हुई. *1951 - 2011 तक यह वृद्धि 216% तक हो गयी.  *2001 - 2011 तक इसमें 20.3% का इजाफा हुआ. * उत्तर प्रदेश में 57 जिले में प्रजनन दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है. देश ...

योगी सरकार और जनसंख्या नियंत्रण नीति

भारत की बढ़ती हुई आबादी से आने वाले दशकों में देश के समक्ष बहुत सी चुनौतियां उत्पन्न होंगी जिसके लिए तैयार रहना आवश्यक है या फिर जनसंख्या नियंत्रण द्वारा इन चुनौतियों से आसानी से निपटा जा सकता है.  बढ़ती हुई आबादी द्वारा आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं, उद्योग धंधे स्थापित होते हैं, रोजगार उत्पन्न होते हैं, वस्तुओं की उपयोगिता बढ़ती है और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होने से प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है जिससे सामाजिक स्तर में सुधार होता है.  इसके विपरीत बढ़ती हुई जनसंख्या द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन होता है. प्रदूषण से कई प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं , प्रति व्यक्ति आय सीमित हो जाती है क्योंकि कुल राष्ट्रीय आय का बंटवारा कई भागों में हो जाता है. परिणामतः लोगों का जीवन स्तर पहले की तुलना में निम्न हो जाता है.  ऐसी स्थिति में  लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को और गति देना पड़ता है जो निवेश प्रोत्साहन के रूप में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और व्यापार से जुड़ा होता है.  जनसंख्या नियंत्रण अपने आप में एक कठिन सवाल भी ह...

पेगासस और भारतीय राजनीति

  अभी हाल ही में पेगासस से संबंधित जो मामले भारतीय राजनीति और मीडिया में चर्चा के विषय बने हुए हैं कि सरकार द्वारा उनका  प्रयोग  पत्रकारों नेताओं के खिलाफ जासूसी में किया जा रहा है.  दरअसल यह मामला पहली बार 2016 को प्रकाश में आया जो संयुक्त अरब अमीरात से जुड़ा है.  बाद के क्रमशः वर्षों में विभिन्न देशों में भी यह चर्चा का विषय बना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव के चलते इजरायल सरकार द्वारा इस प्रोग्राम के डेवलपर कंपनी की जांच के आदेश देने पड़े. पेगासस है क्या?  पेगासस एक स्पाइवेयर प्रोग्राम है जिसे इजरायली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ द्वारा बनाया गया है . यह किस प्रकार काम करता है? टेक्स्ट मैसेजेस के माध्यम से यह स्मार्टफोन तक अपनी पहुंच बनाता है उसके बाद स्मार्टफोन के संवादों, मॉनिटर कॉल्स ,यहां तक कि फोन के कैमरे और माइक्रोफोन को भी एक्टिव कर सकता है। एनएसओ पर लगने वाले आरोप  कंपनी द्वारा कहा गया है कि वह यह प्रोग्राम केवल मान्यता प्राप्त सरकारी एजेंसियों को ही बेजती है जो इसका इस्तेमाल आतंकवाद और अपराधियों के पकड़ने के लिए करती है. जासूसी से संबं...