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स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ और वर्तमान सरकार

आजादी को हासिल किए हमें 75 वर्ष हो गए. इन वर्षों में हमने काफी कुछ उतार-चढ़ाव देखे हैं. विभिन्न विचारधाराएं आई और चली गई. ठीक ही कहते हैं समय से पहले औरअवसर से ज्यादा कुछ भी आप हासिल नहीं कर सकते. हमारे रहन-सहन से लेकर कामकाज के तरीके में परिवर्तन आया है .देश ने तरक्की की है इस बात को नकारा नहीं जा सकता है. आने वाले दशक में हम दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देशों में पहले पायदान पर होंगे यह भी सत्य हैं जो हमारे लिए चुनौतीपूर्ण है. 

समय और संसाधन दोनों हमारे पास सीमित हैं जिनका भरपूर उपयोग करना हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या है. जनसंख्या के आशावादीता का सिद्धांत बढ़ती जनसंख्या पर लागू होते हैं लेकिन कुछ हद तक .उसके पश्चात न ही संसाधन बचते हैं और ना ही समय. आप करेंगे तो क्या? भुखमरी बेरोजगारी गरीबी अपराध हत्या और आत्महत्या के सिवा आपके पास कुछ भी नहीं रहता. अवसर के रूप में आप आईएसआईएस और तालिबान से सबक ले सकते हैं जो इसी का परिणाम है. 

सत्ता में जब सशक्त सरकार होती है तो कधार हाईजैकिंग, आतंकी हमला, कारगिल युद्ध जैसी घटनाएं नहीं घटतीं. इनके प्रतिक्रिया स्वरूप तत्काल निर्णय लिए जाते हैं और यह वर्तमान सरकार कर रही है चाहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीति रूप से घेरना हो चाहे चीन से गलवान घाटी में आंख में आंख डालकर डटे रहना हो. सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण से लेकर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत देसी हथियारों के उत्पादन की बात हो या अंतरिक्ष की दुनिया में अपना दमखम दिखाना हो भारत अब सांप सपेरों का देश नहीं रहा यह बदल रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों से कूटनीतिक संबंध बनाना हो या व्यापार व्यवसाय हो सभी क्षेत्रों में भारत ने प्रगति की है. जब एक मजबूत इरादे वाली सरकार केंद्र में होती है तो उदारवादी लोग निंदा तो करेंगे ही मनमानी जो उनकी नहीं चलती. कांग्रेस इतने दिनों तक सत्ता में रही उसने भी देश हित में कार्य किया लेकिन उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना रहा. आज किसी भी प्रकार की अंतरराष्ट्रीय समस्या के लिए भारत की मंशा जानने के लिए सभी देश इच्छुक होते हैं .

भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पहले की तुलना में काफी बढ़ी है. आज भारत पाश्चात्य देशों के द्वारा एशिया की धूरी के रूप में देखा जाता है जिसमें आने वाले दिनों में विकास की असीम संभावनाएं हैं और उनसे आगे निकलने की भी.  भविष्य के अवसरों को तलाशते हुए ये देश भारत के विकास में भागीदार बनना चाहते हैं. यूरोपीय यूनियन के देश या अमेरिकी महाद्वीप के देशों ने विकसित देशों की श्रेणी भले ही ले ली है, इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि चीन और भारत आने वाले दिनों में व्यापार और वाणिज्य की दिशा और दशा तय करेंगे.

चीन और भारत की तुलनात्मक समीक्षा में पाश्चात्य मुल्क भारत को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं और भारत के साथ सहयोग करने की उनकी मंशा है. इसप्रकार के अंतरराष्ट्रीय छवि का निर्धारण वर्तमान सरकार द्वारा ही नहीं किया गया है, यह हमारी पुरानी विदेश नीति का परिणाम है. बस, अंतर इतना है कि गठबंधन की सरकारों के द्वारा कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत शासन किया जाता रहा और सरकार द्वारा ठोस निर्णय नहीं लिए जा सके. सत्ता में बीजेपी  गठबंधन के साथ ही हैं लेकिन एक तरफा इसके बहुमत के कारण यह गठबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और स्पष्ट निर्णय ले रही है.

 हमारे पास महामारी के दौर में संसाधन अपर्याप्त होते हुए भी सरकार के कड़े फैसले ने होने वाले जान माल की हानि से हमें बचाया है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के कारण यह संदेश स्पष्ट गया है कि भारत में एक मजबूत और टिकाऊ सरकार है जो देश हित में निर्णय लेने में सक्षम है.

 कुल मिलाकर वर्तमान सरकार जिसके हाथों आपने देश की बागडोर सौंप दी है देश का भविष्य बना सकती है या इसे रसातल में ले जा सकती है. कमियां हमारे अंदर हैं जो हम सही निर्णय नहीं लेते और खामियाजा केंद्र में अल्पमत की सरकार बनती है .निर्णय स्पष्ट और देश हित में हो तो मजबूत सरकार का गठन होगा और सही मायने में आप लोकतंत्र के निर्माता होंगे.

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