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COVID -19 और वर्तमान शिक्षा का बदलता स्वरूप

सभ्यताओं का उत्थान और पतन मानव जीवन के विकास और विनाश की कहानी है या यह कह लें कि मानव सभ्यताएं अपने शीर्ष पर पहुंच कर ज़मीनदोज़ हो जाती हैं जो मानवीय भूल और उसकी मूर्खता का कारण होती हैं .प्रत्येक सभ्यता की अपनी एक अलग पहचान होती है .कुछ सभ्यताओं के पतन के कारण महामारी भी हैं. यह सभ्यताएं या तो पूर्णःगर्त में चली जाती हैं या फिर आंशिक रूप से परिवर्तित होकर समय के अनुसार नया रूप ले लेती हैं. वर्तमान स्थिति इसी तरह की बन गई है. कोविड-19 ने पूरी दुनिया के व्यापार वाणिज्य से लेकर शिक्षा व्यवस्था तक को पूरी तरह प्रभावित किया है. हमारे देश के स्कूल कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान पूर्णतः कुछ महीने तक बंद रहे नतीजा यह हुआ की पठन-पाठन सत्र विलंब से शुरू हुए. हमारे परंपरागत पठन-पाठन के तरीके में परिवर्तन आया और लोग घर बैठे ही अध्ययन के सहायक सामग्रियों का उपयोग करने लगे जिसमें तकनीकी की महत्वपूर्ण भूमिका है.

हम जानते हैं कि भारत में कागज का उपयोग विश्व में सबसे ज्यादा किया जाता है. बढ़ते महामारी के कारण कागज का क्रय जो पुस्तक, पुस्तिकाओं,समाचार पत्रों के रूप में है कम किया गया है उसका भी विकल्प डिजिटल पेपर के रूप में सामने आया जिसने भविष्य के शिक्षा माध्यम का बीजारोपण कर दिया है. किसी भी परिवर्तन के पीछे कोई ना कोई घटना सहायक होती है और कोविड-19 ने यह चरितार्थ कर दिया है .लॉकडाउन अवधि में शिक्षण का कार्य ऑनलाइन किया जाने लगा जिसने डिजिटल क्रांति का रूप ले लिया है और भविष्य की शिक्षा नीति निर्धारण की नींव रखी गई है.

यह स्पष्ट है कि इस महामारी कोविड-19 का पूर्णता निराकरण कर पाना संभव नहीं है. जब तक हम हैं तब तक यह किसी न किसी रूप में हमारे साथ हमारे आसपास रहेगा. अतः हमें इसके साथ ही जीवित रहना है और इससे दूर भी रहना है हमारे पास भी विकल्प बहुत सारे हैं लेकिन उनमें सबसे सहज विकल्प भीड़तंत्र के हिस्से से दूर रहते हुए अपने सारे कार्य को संपादित करना है क्या हम इसमें सक्षम है ?क्या हम सक्षम हो पायेंगे?

तत्कालिक विकल्प संभव है इस उम्मीद से कि इसका कोई न कोई दीर्घकालीन समाधान संभव है. इस संदर्भ में आपके अपने मत मतांतर  होंगे .मेरी भी व्यक्तिगत राय अलग है, भविष्य की राह तैयार होने वाले नवयुवकों के दिशा निर्देश द्वारा निर्धारित होगी जिसमें तकनीकी शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.जिस रफ्तार से हमारे देश में नवयुवकों की एक पीढी तैयार हो रही है वह देश की दिशा और दशा दोनों को उन्हें निर्धारित करेंगे.

आज सूचना एवं प्रौद्योगिकी की क्रांति ने ग्लोबल विलेज का रूप ले लिया है.विश्व व्यवस्था एक गांव का रूप ले चुकी है जिसमें सभी धर्म,जाति और समुदाय के लोग रहते हैं. विश्व समुदाय के सामने जब कोविड-19 जैसी महामारी आई तो सभी देशों द्वारा एक दूसरे पर आवागमन से संबंधित पाबंदियां लगा दी गई .लोगों का पलायन विदेशों से स्वदेश में हुआ. कितने परिवार अपने लोगों से मिले और भारत की बात करें तो भारत गांव में बसता है यह कथन चरितार्थ हो गया. गांव नहीं होते किसान नहीं होते तो लोग महामारी से कहीं ज्यादा भुखमरी और कुपोषण से मरते सही मायने में स्वदेश क्या होता है लोग इसे समझने लगे.

 कोविड-19 ने  विश्व समुदाय के समक्ष एक व्यापक पैमाने पर मानवतावादी दृष्टिकोण स्पष्ट कर दिया है  जो वसुधैव कुटुंबकम की हमारी नीति  को  विश्व परिदृश्य में स्पष्ट करता है .सारे राष्ट्र इस महामारी की दवा बनाने में  लग गए. अमेरिका, ब्रिटेन, चीन ,भारत और रूस द्वारा इन दवाओं को  बनाया गया और आज टीके के रूप में  यह दवाएं  बाजारों में उपलब्ध है . टीकाकरण भी तेजी से किया जा रहा है. भारत में मौसमी परिवर्तन के कारण एक बार फिर कोविड-19 तीसरे चरण में तेजी से पांव पसार रहा है.  दिनांक 23 मार्च 2021 को लॉकडाउन को 1 वर्ष पूरे हुए थे  और  सरकार के साथ-साथ जनता को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा हम  इसे अच्छे तरीके से  परिचित हैं.  इस प्रकार की बाधा ना आए उसके लिए डिजिटल तकनीकी के उपयोग पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान  दिया जा रहा है जिसका सार्थक प्रभाव आने वाले देने दिनों में देखने को मिलेगा.  

नवयुवकों की पीढ़ी ऐसी तैयार हो रही है जो नई टेक्नोलॉजी और नई सोच से भरपूर होगी जिस पर रूढ़िवादी व्यवस्था का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. यह पिढी ही रिसर्च और इन्वेंशन से जुड़कर नए विचारों द्वारा नई तकनीकी का इजाद कर उसका प्रयोग करेगी. डिजिटल क्रांति आने वाले 2 दशकों तक अपने पूर्ण विकसित रूप में होगी और हमारे देश के युवा विश्व के विभिन्न देशों के अग्रणी पंक्ति में अपनी उपलब्धि को हासिल करेंगे.

वर्तमान व्यवस्था जिस बदलते स्वरूप की ओर जा रही है इसका एक नकारात्मक पहलू भी सामने आएगा मानव गतिविधियों का संचालन वैज्ञानिक और तकनीकी द्वारा होगा. रोबोटिक सिस्टम्स के प्रयोग द्वारा हर कार्य के लिए  मानव के जगह मशीनेंकृत मानव यानी रोबोट का प्रयोग किया जाएगा. मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रोबोट पर आश्रित होगा .एक समय वह भी आ सकता है कि मानव सभ्यता का संचालन इन मशीनों द्वारा किया जाए .

भविष्य की पीढ़ियां जो यंत्रीकृत होंगी परिवार और मानवीय समाज से दूर होती जाएंगी और परिवार का वजूद समाप्त हो सकता है.ऐसे में एक मानव जीवन की आप कल्पना कर सकते हैं .मानव मशीनों के तरह अपने क्रियाकलाप करते हुए अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करेगा. कल्पनाएं असीम है तो संभावनाएं भी उतनी ही हैं पर मैं और आप आखिर है तो मानव ही हम अपने लिए एक ऐसे संसार के निर्माण में लगे हुए हैं जो विविधताओं, संभावनाओं और अस्तित्व के संघर्ष से जुड़ा हुआ है.

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