आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों की कमजोरी ने एक बार फिर मोदी सरकार की मजबूत दावेदारी को विश्व नेताओं के समक्ष रखा है और आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में मोदी की लोकप्रियता के ग्राफ को काफी ऊंचा कर दिया है .इस ग्राफ में जो बीडेन पीछे होते नजर आ रहे हैं. बिडेन के कूटनीतिक प्रयासों द्वारा दोहा मीटिंग के दौरान अमरीकी फौजों को 31 अगस्त तक देश छोड़ने का आखरी समय दिया गया था. आनन-फानन में अमेरिका द्वारा जाते वक्त वहां कुछ हथियार भी छोड़ दिए गए जो तालिबानी आतंकियों को और मजबूत करने की एक अमेरिकी सोच थी. तालिबानी हुकूमत को पूर्ण समर्थन देने वाला चीन बार-बार उसे आर्थिक मदद की पेशकश कर रहा है और तालिबान को सरकार बनाने में यथा योग्य सहायता भी कर रहा है.अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए चीन पाकिस्तान की तरह प्रत्यक्ष रूप से तालिबान को सहायता करने के बजाय पाकिस्तान को ही माध्यम बनाए हुए हैं .चीन के दबाव से ही पाकिस्तान तालिबान के सरकार गठन में पूर्ण रुप से सहयोग कर रहा है. तालिबानी आतंकी कई गुटों से जुड़े हुए हैं. कई कबिलों के ...