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हिंदू, मुसलमान और जनसंख्या नीति

भारत की जनसंख्या जिस रफ्तार से बढ़ रही है आने वाले दशक में यह देश विश्व की सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश होगा . पिछले सप्ताह ही उत्तर प्रदेश द्वारा जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट 40 पन्नों का तैयार किया गया जिस पर राजनीति शुरू हो गई. विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि यह योगी सरकार का एक  चुनावी स्टंट है. इसमें मुसलमानों की आबादी को निशाना बनाया जा रहा है जबकि जनसंख्या नियंत्रण कानून किसी एक मज़हब से तालुकात नहीं रखता. यह सभी के लिए समान रूप से लागू होता है इस बात की पुष्टि करते हुए कि सच्चाई क्या है ? क्या जनसंख्या नियंत्रण किसी एक वर्ग विशेष से तालुकात रखता है इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखते हैं. इससे पहले कि हम इसकी चर्चा करें उत्तर प्रदेश की जनसंख्या के बारे में कुछ तथ्य स्पष्ट कर दें

*उत्तर प्रदेश की वर्तमान आबादी दुनिया के पांचवें देश के बराबर है .

*1901 -1951 तक उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में 30% की वृद्धि हुई.

*1951 - 2011 तक यह वृद्धि 216% तक हो गयी. 

*2001 - 2011 तक इसमें 20.3% का इजाफा हुआ.

* उत्तर प्रदेश में 57 जिले में प्रजनन दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है.

देश का हर 6वां व्यक्ति उत्तर प्रदेश का है.

योगी सरकार द्वारा नई जनसंख्या नीति 2021 लाने के पीछे राजनीतिक मंशा भले ही नेताओं के विचार से लगती हो , एक दशक बाद जनगणना को देखते हुए यह ड्राफ्ट तैयार करना कोई आपत्तिजनक नहीं लगता. विशेषकर उत्तर प्रदेश सरकार के लिए यह आवश्यक है. देर से ही सही सरकार द्वारा उठाया गया कदम सराहनीय है और किसी के आपत्ति का कोई औचित्य ही नहीं बनता.  क्या जनसंख्या नीति हिंदू हितों को देखते हुए बने या इससे मुसलमान भी प्रभावित होंगे? इसके लिए हम पिछले तीन दशकों के हिंदू ,मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर को देखते हैं

तालिका 1

वर्ष                 हिंदू   मुसलमान   कुलजनसंख्या वृद्धि
                                                   दर
1981-1991  22.7%    32.9 %         23.9%
1991-2001  19.9%    29.3%         21.5%
2001-2011  16.8%     24.6%         17.7%
स्रोत : जनगणना रिपोर्ट.

  
उपरोक्त तालिका स्पष्ट करती है कि हिंदुओं और मुसलमान दोनों के वृद्धि प्रतिशत में कमी आई है.

भारत की कुल जनसंख्या में 1991 तक हिंदुओं की भागीदारी 81.5% थी जबकि मुसलमानों की भागीदारी 12.6%.
 2001 तक हिंदुओं की भागीदारी में 1% की गिरावट आई और 80.5% पर पहुंच गई जबकि मुसलमान 0.8% से बढ़कर 13.4% हो गए .
2011 तक पुनः हिंदुओं की संख्या में 0.7% की गिरावट आई जबकि मुसलमान 0.8% से बढ़कर कुल जनसंख्या का 14.2% होगए.

तालिका 2

कुल जनसंख्या में हिस्सेदारी % में
वर्ष      हिंदू   मुसलमान हिंदू वृद्धि  मुसलमान वृद्धि
1991  81.1%  12.6%
2001  80.1%   13.4%     -1%        + 0.8%
2011  79.8%    14.2%    -0.7%     + 0.8%
स्रोत जनगणना रिपोर्ट

 कुल जनसंख्या हिस्सेदारी में हिंदुओं की संख्या घटी है जबकि मुसलमानों की संख्या बढ़ी है उपरोक्त चार्ट भ्रमित कर सकता है . 
हालांकि पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की गणना के अनुसार 2001 से 2011 तक मुसलमानों की आबादी वृद्धि में 4.7% की गिरावट आई है जो हिंदुओं की गिरावट दर 3.1% से अधिक है .
अब इसे अगर कुल हिंदू आबादी में वृद्धि के रूप में देखें तो 13.9 करोड़ हिंदुओं की वृद्धि हुई जबकि लगभग 3.5 करोड़ मुसलमान बढ़े. 
यह कहना है कि मुसलमानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और जनसंख्या नियंत्रण कानून द्वारा हिंदुओं की संख्या और कम होगी और भारत जल्दी ही मुसलमान देश बन जाएगा मिथक और भ्रामक  है.

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