जनसंख्या वृद्धि की बात सामने आते ही माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत की चर्चा होने लगती है जिसमें उन्होंने जनसंख्या वृद्धि के कारण मानव पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाया है साथ ही स्त्री पुरुष के नैसर्गिक काम आवेग को आधार मानते हुए बताया है कि जनसंख्या वृद्धि की गुणोत्तर श्रेणी जीविकोपार्जन की दर को समानांतर श्रेणी में बढ़ाती है. निष्कर्ष यह है कि उत्पादन की दर जितनी भी बढ़ाई जाए जनसंख्या के वृद्धि दर से कम ही होती है. जनसंख्या वृद्धि दर का स्तर तीव्र ,स्थिर और कम तीन चरणों से संबंधित होता है. प्रथम चरण में जनसंख्या की वृद्धि संसाधनों की तुलना में ज्यादा होती है जिसके चलते समाज में गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी और अपराध ज्यादा होते हैं. द्वितीय चरण में जनसंख्या वृद्धि स्थिर होने से संसाधनों का अनुपातिक उपयोग अनुकूल होता है यानी संसाधन आवश्यकता से ज्यादा उपयोग नहीं होते और भविष्य के लिए सुरक्षित होते हैं . तृतीय चरण में जनसंख्या की घटती दर से वृद्धि संसाधनों के उपयोग की क्षमता को कम कर देते हैं परिणामस्वरूप संसाधन के विपुल भंडार हो जाते हैं जिसका दोहन करने के लिए तीव्र जनन दर...