मस्तिष्क थका हुआ सा लेखनी को धीमी गति से सफेद कागज पर ले जाते हुए मेरे विचारों को लिपिबद्ध करने का प्रयास कर रहा है लेकिन सोचने की क्षमता अवरुद्ध सी हो गई है. नए विचार कहां से लाऊं? आंतरिक ध्वनि मुझे विचार शून्य करती जा रही है अवरुद्ध होने का प्रयास जारी है फिर भी लिखता जा रहा हूं . दैनिक कार्यों में से एक कार्य अध्ययन- अध्यापन से जुड़ा है इसीलिए लेखनी को तराशने की कोशिश करता रहता हूं. विचारों के भवर में होने से अच्छा है कि दो शब्द मन के अल्फाजों को लिखते हुए नींद की आगोश में चला जाऊं. हो सकता है लिखना आधा अधूरा रह जाए और मैं सो जाऊं एक मधुर सपनों को देखता हुआ. जब नींद से प्रातः उठ जाऊं तो मुझे विस्मृत हो जाए शेष लेखन का सफर. जीवन का उद्देश्य एक उपलब्धि को पाने की ललक बहुत कम लोगों में होती है क्यों ?इसलिए कि भौतिकवादी जीवनयापन आपके विचारों को सीमित कर देता है और आप न चाहते हुए भी अपने इस जीवन शैली के बंधनों में उलझ कर रह जाते हैं. अभी अपनी यही मनोदशा है. आप यह जानते हैं कि मन कमबख्त बहुत ही चलायमान है. इसे आपके नियंत्रण की आवश्यकता नहीं ,जहां चाहे वहां मौज...