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विचारों की मनोदशा

 मस्तिष्क थका हुआ सा लेखनी को धीमी गति से सफेद कागज पर ले जाते हुए मेरे विचारों को लिपिबद्ध करने का प्रयास कर रहा है लेकिन सोचने की क्षमता अवरुद्ध सी हो गई है. नए विचार कहां से लाऊं? आंतरिक ध्वनि  मुझे विचार शून्य करती जा रही है  अवरुद्ध होने का प्रयास जारी है फिर भी  लिखता जा रहा हूं . दैनिक कार्यों में से एक कार्य अध्ययन- अध्यापन से जुड़ा है इसीलिए लेखनी को तराशने की कोशिश करता रहता हूं. विचारों के भवर में होने से अच्छा है कि दो शब्द मन के अल्फाजों को लिखते हुए नींद की आगोश में चला जाऊं. हो सकता है लिखना आधा अधूरा रह जाए और मैं सो जाऊं एक मधुर सपनों को देखता हुआ. जब नींद से प्रातः उठ जाऊं तो मुझे विस्मृत हो जाए शेष लेखन का सफर. जीवन का उद्देश्य एक उपलब्धि को पाने की ललक बहुत कम लोगों में होती है क्यों ?इसलिए कि भौतिकवादी जीवनयापन आपके विचारों को सीमित कर देता है और आप न चाहते हुए भी अपने इस जीवन शैली के बंधनों में उलझ कर रह जाते हैं. अभी अपनी यही मनोदशा है. आप यह जानते हैं कि मन कमबख्त  बहुत ही चलायमान है. इसे आपके नियंत्रण की आवश्यकता नहीं ,जहां चाहे वहां मौज...

तालिबानी अफगानिस्तान और भारत पर उसके प्रभाव

तालिबान का काबुल पर कब्जा होने के बाद उसके द्वारा सार्वजनिक रूप से यह कहा गया कि वहां की आवाम को उन से डरने की आवश्यकता नहीं है. फिर भी तालिबान के विगत वर्षों के अनुभव से उस पर विश्वास करना संभव नहीं है .अफगानिस्तान के लोगों का पलायन बाहर के मुल्कों में तेजी से हो रहा है. तालिबानी नेताओं द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया कि वह बदल गए हैं. उसके कथनी और करनी में अब तक अंतर ही रहा है. काबुल को नियंत्रण में लेते ही स्त्रियों पर उसने अपने कानून सख्त कर दिए. अफसर गनी अपने कुछ लोगों के साथ विदेश पलायन कर गए क्योंकि अमेरिका ने मदद करने से हाथ खड़े कर दिए. अमेरिकी रणनीति 9/11 के आतंकी हमले को अमेरिका द्वारा मानवता बनाम आतंकवाद के युद्ध का नाम दिया गया वहीं तात्कालिक राष्ट्रपति जो बिडेन का यह कहना है कि बस; अमेरिकी धरती पर किसी प्रकार का आतंकवादी हमला न हो दोहरे मापदंड को दर्शाता है. एक तरफ आतंकियों के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई को विश्वरूप देना तो दूसरी तरफ अपनी अस्मिता की दुहाई देना समझने वाली बात है. अमेरिका को आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में काफी नुकसान उठाना पड़ा जिस...

योगी ;कर्मयोगी, राजयोगी, बनाम राजभोगी

योग अर्थात व्यक्ति विशेष का समाज से जुड़ाव है. समाज से जुड़कर समाज के अनुरूप रहते हुए समाज के लिए कार्य करने वाला व्यक्ति योगी है. एक योगी का कार्य मानव मात्र के लिए कल्याण है किसी मजहब के लिए नहीं . आपको थोड़ी द्विधा भी होगी और अचरज भी.  एक आदर्श समाज की स्थापना योग है.इसमें रमे रहना योग है और कर्ता योगी है. सामाजिक निर्माण की कल्पना से ही राष्ट्र का स्वरूप निर्धारित होता है और योगी का तपोबल उसमें कार्य करता है .उसकी रचना में प्रकृति भी सहायता करती है .चाहे प्राकृतिक आपदा हो या मानवीय आपदा सदैव योगी की परीक्षा होती है और व्यक्ति कर्ता होते हुए भी अकर्ता का भाव लेकर नित्य निरंतर समाज निर्माण में लगा रहता है. संभावित घटनाओं का साक्षी होते हुए भी एक दृष्टा का भाव योगी रखता है, अनासक्त होकर कर्म करता है. योगी की श्रेणी में इससे ऊपर राजयोगी आता है जो इससे अधिक अनासक्त होता है. राजयोगी समस्त भौतिक सुखों से जुड़ा रह कर भी अनासक्त होकर कर्म करता है. वह राजप्रासाद का उपयोग जन कल्याण हेतु करता है. नियमों से बंधे होने के कारण सैद्धांतिक जीवन जीता है और समाज कल्याण का कार्य करता है.  कोई ...

स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ और वर्तमान सरकार

आजादी को हासिल किए हमें 75 वर्ष हो गए. इन वर्षों में हमने काफी कुछ उतार-चढ़ाव देखे हैं. विभिन्न विचारधाराएं आई और चली गई. ठीक ही कहते हैं समय से पहले औरअवसर से ज्यादा कुछ भी आप हासिल नहीं कर सकते. हमारे रहन-सहन से लेकर कामकाज के तरीके में परिवर्तन आया है .देश ने तरक्की की है इस बात को नकारा नहीं जा सकता है. आने वाले दशक में हम दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देशों में पहले पायदान पर होंगे यह भी सत्य हैं जो हमारे लिए चुनौतीपूर्ण है.  समय और संसाधन दोनों हमारे पास सीमित हैं जिनका भरपूर उपयोग करना हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या है. जनसंख्या के आशावादीता का सिद्धांत बढ़ती जनसंख्या पर लागू होते हैं लेकिन कुछ हद तक .उसके पश्चात न ही संसाधन बचते हैं और ना ही समय. आप करेंगे तो क्या? भुखमरी बेरोजगारी गरीबी अपराध हत्या और आत्महत्या के सिवा आपके पास कुछ भी नहीं रहता. अवसर के रूप में आप आईएसआईएस और तालिबान से सबक ले सकते हैं जो इसी का परिणाम है.  सत्ता में जब सशक्त सरकार होती है तो कधार हाईजैकिंग, आतंकी हमला, कारगिल युद्ध जैसी घटनाएं नहीं घटतीं. इनके प्रतिक्रिया स्वरूप तत्काल निर्णय लिए जाते ...

संसद की मर्यादा हाशिए पर

मानसून सत्र के आखिरी दिन संसद के दोनों सदनों के सांसदों द्वारा जिस प्रकार का बर्ताव संसद सत्र के दौरान किया गया वह बहुत निंदनीय है और ऐतिहासिक दृष्टि से लोकतंत्र की मर्यादा को शर्मसार करने वाली है. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की विधायिका का जब यह हाल है तो लोकतंत्र राम भरोसे ही समझिए. राज्यसभा जिसे बड़े बुजुर्गों का सदन कहा जाता है गणमान्य लोगों का सदन है और स्थाई सदन भी है जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता है ऐसा हम जानते हैं लेकिन इस सदन को भंग करने का ऐसा भी एक तरीका आने वाले दिनों में हो सकता है इसे हमने देखा और जाना भी. सरकार संसद सत्र के दौरान विभिन्न बिलों पर चर्चा करने के मूड में दिख रही थी लेकिन विपक्ष सरकार का पेगासस मुद्दे पर  घेराव करना चाह रही थी. बिलों पर चर्चा करने के बजाय पक्ष - विपक्ष द्वारा शोर कर संसद का कार्य बाधित करने का प्रयास किया गया . यह काम 10 और 11 अगस्त को दोनों सदनों में पक्ष- विपक्ष के सांसदों द्वारा किया गया. यह संसद कार्यकाल में डिजिटल मीडिया में हमेशा के लिए दर्ज कर लिया गया है. दोनों ही पक्षों द्वारा अब आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं. गलती किसकी है ...

अन्य पिछड़े वर्ग की राह नई जनसंख्या नीति 2021

लोकसभा में 10 अगस्त को पेगासस मुद्दे पर बहस के बीच ही कुछ विधेयक लाए गए जिसमें ओबीसी विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. आने वाले विधानसभा चुनाव 2022 में इसका फायदा राजनीतिक दलों को मिलने की संभावना बनती है. जिस राजनीतिक दल द्वारा जातियों को ओबीसी में शामिल किया जाएगा उसका फायदा उन्हें मिलेगा. हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में 27 ओबीसी मंत्रियों को शामिल किया गया है और ओबीसी कानून भी लाया गया जिसकी राजनीतिक मंशा स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है और हाँ 50 फ़ीसदी आरक्षण का  हर हालत में ध्यान में रखना है. अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित परीक्षाओं में 15% अनुसूचित जातियों से 7.5% जनजातियों से और 27% ओबीसी वर्ग  से आरक्षण दिया जाता है.  ऐसे में  राज्य सरकारों द्वारा ओबीसी श्रेणी में जातियों को शामिल करने पर इसका दायरा बढ़ाने की आवश्यकता होगी.  करीब 671 जातियां ऐसी पूरे देश में  हैं जो ओबीसी श्रेणी के अंतर्गत आने लायक है . इसलिए एक महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि किसे शामिल किया जाए और किसे इस श्रेणी से हटाया जाए.   राज्य सरकारों को इन विकट समस्याओं ...

127वां संविधान संशोधन और जाति आधारित जनगणना

पृष्ठभूमि 2021 की जनगणना की राह जातीय समीकरण की ओर जाते हुए प्रतीत हो रही है और इसी को देखते हुए जहां उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण विधेयक 2021 प्रारूप तैयार कर इसे पारित करने का प्रयास किया जाएगा वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार द्वारा 10 अगस्त को 127 वां संविधान संशोधन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 342 और 366 (22)cमें संशोधन कर राज्यों को ओबीसी सूची बनाने का अधिकार दिया गया. अब राज्य अपने स्तर पर हो रही मांगों के अनुसार ओबीसी सूची तैयार कर सकेंगे. इस विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों द्वारा पारित कर राज्यों को यह अधिकार दिए गए जो लंबे समय से मांग किए जा रहे थे .  ओबीसी समूह में शामिल होने को लेकर महाराष्ट्र में मराठा समुदाय, हरियाणा में जाट ,गुजरात में पटेल और कर्नाटक में लिंगायत समुदाय द्वारा मांग की जा रही थी अब उन्हें इस कैटेगरी का लाभ मिल सकेगा. राजनीतिक पहल जाति आधारित जनगणना की पहल मोदी सरकार द्वारा पहले की गई किंतु पार्टी के आंतरिक दबाव के कारण इसे बीच में ही छोड़ना पड़ा था. महाराष्ट्र में भी पूर्व के बीजेपी सरकार द्वारा मराठा समूह को लेकर एक विधेयक पारित किया ...